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       जिंदगी जिंदगी फूल- सी है, कुदरत की गोद में खिलती है, मुस्कराती है, खुशबू से फिजा को महकाती है, और एक दिन बिखरकर, बसुन्धरा की ग...

रविवार, 18 जनवरी 2026

विश्व हिम दिवस (World Snow Day)

World Snow Day 

आज 18 जनवरी 2026 है और पूरी दुनिया में  World Snow Day का जश्न मनाया जा रहा है। अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं या आपको बर्फ से ढके पहाड़ पसंद हैं, तो आज का दिन आपके लिए बेहद खास है।

इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि आखिर यह दिन क्यों मनाया जाता है और 2026 में इसकी क्या खासियत है।

World Snow Day2026 की थीम (Theme)

इस साल भी विश्व स्नो डे अपने उसी जोश और मोटो के साथ मनाया जा रहा है, जो इसे खास बनाता है: "Explore, Enjoy and Experience" (खोजें, आनंद लें और अनुभव करें)

इस थीम का मुख्य उद्देश्य बच्चों और उनके परिवारों को घरों से बाहर निकलकर बर्फ के करीब लाना और शीतकालीन खेलों (Winter Sports) के प्रति जागरूक करना है।

विश्व हिम दिवस (World Snow Day): महत्व और इतिहास

विश्व हिम दिवस (World Snow Day) हर साल जनवरी के तीसरे रविवार (Sunday) को मनाया जाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय उत्सव है। यह दिन विशेष रूप से बच्चों और उनके परिवारों को बर्फ (Snow) का आनंद लेने और विंटर स्पोर्ट्स (शीतकालीन खेल) के प्रति जागरूक करने के लिए समर्पित है।

1. विश्व हिम दिवस क्या है?

विश्व हिम दिवस "इंटरनेशनल स्की फेडरेशन" (FIS) द्वारा शुरू किया गया एक वैश्विक अभियान है। यह "ब्रिंग चिल्ड्रेन टू द स्नो" (बच्चों को बर्फ तक लाएं) कार्यक्रम का दूसरा चरण है। इस दिन पूरी दुनिया में बर्फ से जुड़ी विभिन्न गतिविधियाँ और उत्सव आयोजित किए जाते हैं।

2. इसे क्यों मनाते हैं? (कारण)

इस दिन को मनाने के पीछे कई मुख्य कारण हैं:

  • स्वास्थ्य और फिटनेस: आजकल बच्चे डिजिटल स्क्रीन पर अधिक समय बिताते हैं। विश्व हिम दिवस उन्हें बाहर निकलने और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने के लिए प्रेरित करता है।
  • विंटर स्पोर्ट्स का प्रचार: स्कीइंग (Skiing), स्नोबोर्डिंग (Snowboarding) और स्केटिंग जैसे खेलों को लोकप्रिय बनाना।
  • प्रकृति से जुड़ाव: लोगों को प्रकृति और बर्फ के सुंदर वातावरण से जोड़ना।

3. यह कब से मनाया जा रहा है? (इतिहास)

विश्व हिम दिवस की शुरुआत साल 2012 में हुई थी।

  • पहली बार इसे 22 जनवरी 2012 को मनाया गया था।
  • पहले ही साल में इसे 20 से अधिक देशों में 225 से ज्यादा कार्यक्रमों के साथ शुरू किया गया था।
  • तब से हर साल जनवरी के तीसरे रविवार को यह धूमधाम से मनाया जाता है।

4. इसके मुख्य उद्देश्य (Objectives)

विश्व हिम दिवस के प्रमुख उद्देश्य नीचे दिए गए हैं:

  • बच्चों को प्रेरित करना: 4 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को बर्फ पर खेलने और सीखने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • सुरक्षा जागरूकता (Safety Awareness): बच्चों को बर्फ पर खेलते समय सुरक्षा के नियमों (जैसे हेलमेट पहनना और सही तकनीक का उपयोग) के बारे में सिखाना।
  • पर्यावरण संरक्षण (Environment Conservation): बर्फ और ग्लेशियर के महत्व को समझाना और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रति जागरूक करना, ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए बर्फ सुरक्षित रहे।
  • यादें बनाना: परिवारों को एक साथ लाकर बर्फ में यादगार समय बिताने का अवसर देना।

5. इसे कैसे मनाया जाता है?

इस दिन दुनिया भर के स्की रिसॉर्ट्स और विंटर डेस्टिनेशंस पर कई तरह की छूट (discounts) दी जाती है।

  • मुफ्त स्की सबक (Free Ski Lessons): कई जगहों पर बच्चों को मुफ्त में स्कीइंग सिखाई जाती है।
  • स्नो फेस्टिवल्स (Snow Festivals): बर्फ के पुतले (Snowman) बनाना, स्नोबॉल फाइट्स और संगीत कार्यक्रमों का आयोजन होता है।
  • उपकरण किराया (Equipment Rental): खेल के उपकरण सस्ते दामों पर किराये पर दिए जाते हैं।

निष्कर्ष: विश्व हिम दिवस सिर्फ मनोरंजन का दिन नहीं है, बल्कि यह एक स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी को दर्शाता है। यह बच्चों को मोबाइल की दुनिया से बाहर निकल कर प्रकृति की गोद में खेलने का एक शानदार मौका देता है।

सोमवार, 9 जनवरी 2023

अरण्य

कुल्हाडी बज रही है ,
कहीं दूर ।
अरण्य में फड़फड़ाते हैं ,
पक्षी, पिक, सारंग,मयूर ।
चौककर उदग्रीव शावक हिरणें देखती हैं घूर।
सोचतीं ,
आज का मानव कैसा हो गया क्रूर ।
पेड़ काटने में अपने को समझता है शूर ,
हाय ,हम क्या करें?
आज नहीं ,
वह कल रोयेगा बिसूर- बिसूर ॥

प्रज्ञा अपराध

किसे नहीं पता ?
पृथ्वी में कार्बनडाई आक्साइड की मात्रा 
निज कृत्य से 
नित्य बढ़ रही है ,
तापमान बढ़ रहा है
जलवायु में परिवर्तन हो  रहा है ।
कहीं अकाल , कहीं बाढ़
कहीं तूफान , कहीं सुनामी
जीना कठिन हो रहा है ।
फिर भी अपने को ज्ञानी कहलाने वाला मनुष्य
अभी भी नहीं चेत रहा
परिवेश को किसी न किसी बहाने
अपने कर्मों से विनाश की ओर झोंक रहा है ।
वनों को काटना
पहाड़ों को तोड़ना ,  
बड़े - बड़े बांध बनाना 
ऊचे - ऊचे भवन बनाना 
 शहरों से गन्दी नालियों एवं कारखानों से
निकला गंदा पानी को नदियों में छोड़ना ,
निर्मल जल को प्रदूषित करना। 
चिमनियों  से निकलता धुआं
खेती में कीटनाशकों का बढ़ता प्रयोग,
वातानुकूलन हेतु एसी का बढ़ता प्रयोग ,
वाहनों से निकला हुआ धुआँ ,
खुले में कचड़ों को जलाना ,
दिन-प्रतिदिन बढ़ता प्रदूषण ,
जीवों के लिए खतरा बनता जा रहा है ,
साँसों की बीमारी बढ़ा रहीं हैं,
मनुष्यों की सेहत बिगाड़ रही है ,
जीवों का जीवन संकट में है , 
जीव विलुप्त हो रहे हैं। 
मनुष्य इनसे विज्ञ है ,
किन्तु प्रज्ञा अपराध करता जा रहा है।  

अपने अहं की तृप्ति के लिए युध्द करना ,
युध्द में अस्त्र-शस्त्र का प्रयोग ,
विनाशकारी बमों से हमला करना ,
यह सबकुछ पर्यावरण के दुश्मन ही तो हैं।  
ख़ुशी के दिन हों या तीज - त्यौहार,
नववर्ष हो ,जीत की खुशी हो , 
खुशियाँ बांटने की जगह
बारूद का धुआं बाँटना ,
यह कब तक चलेगा ,
इसका अंत निकट है। 

ऐ प्रज्ञावान मनुष्य चेतो ,
अपने कृत्य से सुन्दर धरा को 
नरक मत बनाओ ,
मौत का कुआँ मत बनाओ ,
अभी भी वक्त है ,सम्हल जाओ , 
पेड़ लगाओ,
सुगन्धित औषधियुक्त दृव्यों का हवन करो,
बंद करो आपस में लड़ना, 
बमों  का प्रयोग,
बारूद से परहेज करो ,
पृकृति से प्यार करो ,
धरती को हरियाली से सजाओ ,
धरती के अस्तित्व के साथ ही तुम्हारा अस्तित्व है ,
जागो , नहीं मिट जाओगे।





शुक्रवार, 7 सितंबर 2018

मृत्यु

मृत्यु आत्मोत्सव है।  
उसके आलिंगन से क्या डरना ?  
जीवन के रण में निर्भय होकर ,
कर्म-पथ पर  आगे बढ़ते रहना। 

प्रकृति के कण-कण में गुम्फित है ,
जय-पराजय की संघर्षी गाथा।
जो संघर्ष करता है वही, 
 विजय श्री को  वरण कर  पाता। 

कानन में मृग सतर्क किन्तु निर्भय 
चरते ,कुलाँचे भरते, विचरण करते हैं।  
आसमान पर नाना विहग, ऊँचाई मापते  ,
मैदानों से दुर्गम हिमालय तक 
बिना थके, बिना डरे , उल्लास से उड़ानें भरते हैं।

इस धरती पर जो भी आया, 
उसका जाना निश्चित है।  
इस कडुवे सच से 
क्या कोई  वचित है ? 

उठो , बढ़ो आगे मंजिल है ,
मृत्यु भय से कदम न पीछे करना,
मृत्यु आत्मोत्सव है ,
उसके आलिंगन से क्या डरना ?


 


शुक्रवार, 23 मार्च 2018

यह कैसा आनंद (व्यंग्य रचना )

व्यंग्य रचना 
यह कैसा आनंद
यदि आनन्द पूछना है तो उनसे पूछिए जो पीठ पीछे बुराई करते हैं । पीठ पीछे बुराई का  मजा ही कुछ और होता है। चटकारे मारते हुए बखिया उखाड़ने की कला में माहिर जन को कभी बोर नही होना पड़ता। उनका वदन अलग ही दिखाई पड़ता है। चेहरे पर विद्रूप हँसी हमेशा विद्यमान रहती है। ये जब तक निंदा के शतक नहीं लगा लेते विश्राम नहीं करते।
ये यदि बुझे से दिखें तुरन्त इन्हें निंदा शक्तिवर्धक अवलेह चटा दें। जैसे ही आप चटाएंगे वैसे ही ये हरे- भरे हो जाएँगे। चेहरे पर वही चमक लौट आती है जो पहले थी।
आज ऐसे लोग बिरले ही होंगे जो यह कहकर उनकी निंदा को खुजलादेते होंगे कि कुत्ते भौंकते रहते हैं हाथी अपनी चाल चलता रहता है। अपनी निंदा अपने सामने सुनने का साहस बिरले में  होता है
कबीर ने निंदक को अपने पास आँगन- कुटी बनवाकर रखने को कहा है। उन्होंने कहा-
निंदक नियरे राखिए आँगन- कुटी छवाय।
बिन पानी साबुना, निर्मल करै सुभाय।।
यदि निंदा बुरी चीज होती, निंदक बुरे होते तो एक संत उन्हें क्यों अपने साथ रखने के लिए कहता।

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2017

गरबा

गुजरात की पहचान है गरबा ,
लोकगीत की शान है गरबा 
नृत्य की जान है गरबा 
मन मुग्ध कारी नृत्यगान है गरबा । 

प्रेरक

कर्म 

जन्म सब लेते हैं,
कर्म भी सब करते हैं ,
किन्तु कुछ खास होते हैं ,
जो अपने कर्मों से
इतिहास बनाया करते हैं । 


कर्म-पथ 

कर्म पथ सरल नहीं,
यह मैंने अनुभव से सीखा है ,
शिक्षा-जगत की फुलवारी को 
मैंने अपने श्रम-सीकर से सींचा है । 
उम्र नहीं बाधा मेरे कर्म-पथ की ,
मंजिल को मैनें मुट्ठी में मींचा है । 

सोच 

जिंदगी का यह है तजुर्बा 
सोच से जीत और हार होती है ,
यह भी सच है ,
जिनकी सोच होती है ऊँची 
उन्हीं के गले में जीत की हार होती है ।